Friday, November 22, 2024

वो

 

जो रंग पहनती थी,

उसे रंगीन बना देती थी वो

जिस जगह जाती थी,

उसे हसीन बना देती थी वो

 

हर इक महफिल की,

जान थी वो

मेरे जैसे अनजानों की,

पहचान थी वो


हंसी को हंसना,

सिखाती थी वो

उदास चेहरों में,

उम्मीद जगाती थी वो

 

छोटा हो या बड़ा,

कुछ मतलब नहीं था

हर किसी के सुख,

दुख में जाती थी वो

 

संगीत की धुन सुनतें ही,

पैर अपने आप उठ जाता था

बड़ो को देखते ही,

सिर ख़ुद ही झुक जाता था

 

दोस्तों के लिये,

दोस्ती का पैमाना थी वो

कुछ वक्त नहीं मेरे लिए,

ज़माना थी वो

 

दिन हो या रात,

उसकी यादों में खो जाता  हूं

कानो में चुपके कुछ कहती है,

तो सूकून से सो जाता  हूं

शमिंदर कौर रंजीत

बातें

 

कुछ आवाज़ों वाली बातें
कुछ खामोशी वाली बातें
कुछ होश वाली बातें
कुछ मदहोशी वाली बातें
 
कुछ गम वाली बातें
कुछ ख़ुशी वाली बातें
कुछ उम्मीद वाली बातें
कुछ उदासी वाली बातें
 
कुछ दिल वाली बातें
कुछ दिमाग वाली बातें
कुछ दान वाली बातें
कुछ हिसाब वाली बातें
 
कुछ नादान बातें
कुछ समझदार बातें
कुछ बेईमान बातें
कुछ इमानदार बातें
हर बात से  निकलती
कुछ नयी बातें
कुछ तेरी बातें
कुछ मेरी बातें

शमिंदर कौर रंजीत

Monday, November 4, 2024

उम्मीद

 

जलती लकड़ी देख चुका हूँ

बहता पानी देख चुका हूँ

ठहर जा जरा आसमां,

तुझ तक मेरी उड़ान अभी बाक़ी है

 

आँखों के आँसु मर चुके हैं

दिमाग सुन्न पड़ चुका है

पर दिल है कि हारता नहीं,

इसकी तमन्नाओं का सैलाब अभी बाक़ी है

 

बहुत उलटे सीधे सवाल पुछे हैं

कुछ आसान हैं कुछ मुश्क़िल हैं

इतनी जल्दी नतीजा मत निकाल ऐ ज़िन्दगी,

मेरा जवाब अभी बाकी है

 

कुछ उदास चहरे भी देखे हैं

कुछ हारे दोस्त भी देखे हैं
उन उदास चेहरो की ख़ुशी,

उन दोस्तो की जीत बनना अभी बाक़ी है

 

शमिंदर कौर रंजीत

वो

  जो रंग पहनती थी , उसे रंगीन बना देती थी  वो जिस जगह जाती थी , उसे हसीन बना देती थी  वो   हर इक महफिल की , जान थी वो मेरे जैस...