जलती लकड़ी देख चुका हूँ
बहता पानी देख चुका हूँ
ठहर जा जरा आसमां,
तुझ तक मेरी उड़ान अभी बाक़ी है
आँखों के आँसु मर चुके हैं
दिमाग सुन्न पड़ चुका है
पर दिल है कि हारता नहीं,
इसकी तमन्नाओं का सैलाब अभी बाक़ी है
बहुत उलटे सीधे सवाल पुछे हैं
कुछ आसान हैं कुछ मुश्क़िल हैं
इतनी जल्दी नतीजा मत निकाल ऐ ज़िन्दगी,
मेरा जवाब अभी बाकी है
कुछ उदास चहरे भी देखे हैं
कुछ हारे दोस्त भी देखे हैं
उन उदास चेहरो की ख़ुशी,
उन दोस्तो की जीत बनना अभी बाक़ी है
शमिंदर कौर रंजीत
No comments:
Post a Comment